Saturday, June 24, 2017

कक्षा ८ के लिए मुहावरों की कहानी (Muhawaron ki kahani for class 8)

मुहवारों की कहानी सौष्ठव की ज़ुबानी

एक गाँव में एक बुढ़िया रहती थावह दिन रात मेहनत कर के अपना और अपने पोते का पेट पालती थी. पोते का नाम राम था। वह बहुत मेहनती था। उसके गाँव में एक साहूकार था। उसका नाम तो दीनदयाल था पर नाम बड़े और दर्शन छोटे यानी वह कतई दयालु न था। बुढ़िया  ने साहूकार को अपने पोते की पढ़ाई में मदद करने के लिए प्रार्थना की पर उसके कान पर जूं तक न रेंगी. हारकर बुढ़िया ने हथियार डाल दिए और अपने जिगर के टुकड़े पोते को शहर में एक रिश्तेदार के घर भेज दिया । शहर में राम का जीवन कठिनाई से गुजरने लगा क्यूंकि रिश्तेदार की पत्नी यानी उसकी मामी को राम फूटी आँख न सुहाता था। राम एक किताबी कीड़ा था और वह उसे घर के काम में ही उलझाये रखना चाहती थी। इसलिए वह अपने पति के साथ भी तू तू मैं मैं किया करती। लोगों के कहने पर वह फूट-फूट कर रोती  कि यहाँ खुद के खाने के लाले पड़े हैं और उसके पति ने छाती पर मूंग दलने के लिए इस मुसीबत को उसके सर पर ला पटका था। राम सदा उससे बचने के लिए हाथ-पैर मारता क्योंकि वह सिर्फ पढ़ाई करना चाहता था। जैसे ही मामी  आवाज लगाती उसे सांप सूंघ जाता था। एक दिन मामी ने राम को कुछ पैसे दिए कि वह विद्यालय से आते हुए घर का सामान खरीद लाए । इस तरह एक पंथ दो काज हो जायेंगे । पर राम घर आते हुए भूल गया कि उसे घर जाते हुए कुछ काम करना है ।  घर में घुसते ही उसकी नज़र मामी पर पड़ी । उसे खाली हाथ देख कर मामी का पारा सातवें आसमान पर जा पहुंचा । राम की हालत भीगी बिल्ली की तरह हो गई। मामी ने उसे एक कमरे में बंद कर दिया और कुछ भी खाने को न दिया । रात को राम के पेट में चूहे कूदने लगे तो उसने कमरे में कुछ खाने की चीज ढूंढने की सोची । एक पोटली में कुछ चने देखकर उसकी बांछें खिल उठीं डूबते को तिनके का सहारा सोचकर वह उन चनों पर टूट पड़ा । सुबह राम को नित्य की भांति तैयार होते देखकर मामी का माथा ठनका कि हो न हो दाल में कुछ काला है जो राम खाना नहीं मांग रहा। राम ने मामी से पिछले दिन की भूल के लिए क्षमा मांगी और विद्यालय को निकल पड़ा।

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